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कमलनाथ के लिए खतरे कि घंटी बजी….ज्योतिरादित्य सिंधियाने लेटरहेड में भी किया बदलाव…!!

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कमलनाथ सरकार को लिखे पत्र में ज्योति ने अपना सिर्फ नाम ही लिखा ओर कुछ नही…!, क्या पिता की पार्टी फिर से जिंदा करने जा रहे है ज्योतिरादित्य सिंधिया…?

(जी.एन.एस.) भोपाल, दि.28
महाराष्ट्रमें जहां कांग्रेस अन्य सहयोगी दलों के साथ ठाकरे सरकारमें शामिल होने जा रही है वहीं दुसरी ओर मध्यप्रदेश में पार्टी के बडे नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर चल रही अटकलों को बल मिलनेलायक एक घटना में सिंधिया ने चंबल एक्सप्रेस को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ को जो आधिकारिक पत्र लिखा है उसमें उन्हों ने कहीं भी खुद को कांग्रेस का नेता या पूर्व सांसद या फिर ट्वीटर में जो लिखा लोकसेवक ऐसा कुछ भी नहीं लिखा. यह पत्र उन्हों ने ही सार्वजनिक किया है. जिसे लेकर चल रही अटकलें बता रही है कि वे अपने पिता द्वारा पहले स्थापित की गइ पार्टी को फिर से पुनर्जिवित करने का प्लान कर रहे है.
जानकारी अनुसार, ग्वालियर अंचल के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की हड़ताल जारी है। पिछले दिनों उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना परिचय बदलते हुए खुद को केवल समाजसेवी बताया था अब अपने लेटर हेड से भी कांग्रेस को बाहर कर दिया है। यह लेटर हेड खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सार्वजनिक किया है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम पत्र लिखा है। यह पत्र उन्होंने खुद सार्वजनिक किया। इस पत्र में बात तो चंबल एक्सप्रेस-वे की की गई है लेकिन मैसेज कुछ और है। ध्यान से देखें तो लेटरहेड से उन्होंने अपना परिचय हटा दिया है। ना तो पूर्व मंत्री और ना ही पूर्व सांसद यहां तक कि कांग्रेस कार्यकर्ता तक नहीं लिखा। लेटर हेड पर सिर्फ “ज्योतिरादित्य सिंधिया” लिखा है। बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया पहले अपने नाम के नीचे “पूर्व संसद सदस्य, लोकसभा” लिखते थे।
बता दें कि मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास 20 विधायकों का समर्थन हासिल है। यह सभी विधायक कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीते हैं। सीएम कमलनाथ कैंप में अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर चिंता साफ नजर आ रही है। बीते रोज कमलनाथ के नजदीकी सांसद विवेक तन्खा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से बात की थी। मध्यप्रदेश में कांग्रेस के सबसे शक्तिशाली नेता दिग्विजय सिंह फिलहाल चुप हैं लेकिन यदि हालात बिगड़े तो दिग्विजय सिंह का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो जाएगा।
मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों की संख्या कम नहीं है। ज्यादातर सिंधिया समर्थक चाहते हैं कि वह “मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस पार्टी” को फिर से जीवित करें। मध्य प्रदेश की राजनीति का इतिहास बताता है कि यहां कांग्रेस और भाजपा के अलावा किसी तीसरी पार्टी जड़े मजबूत नहीं हो पाई। खुद माधवराव सिंधिया भी अपनी पार्टी को लंबे समय तक नहीं चला पाए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया शायद इसी उधेड़बुन में है। यदि वह अपनी पार्टी बनाते हैं तो मध्यप्रदेश में पार्टी की स्थिति क्या होगी।
बात चंबल एक्सप्रेस-वे की लेकिन मैसेज कुछ और, ज्योतिरादित्य सिंधिया को मनाने की कोशिशें तेज, क्या पिता की पार्टी फिर से जिंदा करेंगे ज्योतिरादित्य सिंधिया…?

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