Home डॉ. दीपक आचार्य जहाँ कावड़, वहाँ सावन

जहाँ कावड़, वहाँ सावन

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Share this articleइन दिनों देश भर में सावन की मदमस्ती और भोले बाबा की आराधना का दौर पूरे परवान पर है। हर कहीं कावड़ यात्रा का धरम सिर चढ़कर बोलने लगा है। ज्योतिर्लिंगों से लेकर गांव-शहरों के शिवालयों तक कावरियों की निरन्तर बनी रहने वाली भरमार यही बता रही है। कावड़ और सावन का रिश्ता शाश्वत है। यह श्रद्धा से लेकर श्राद्ध तक और शासन से लेकर परशासन के गलियारों
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