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देश में …मोदी लहर….एक राजकिय भ्रम…?

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सभी राज्यो में केसरी परचम नहीं है तो मोदी मैजिक काहे का….?!
पूरे देश में विधानसभा की कुल 4139 सीट में से भाजपा के पास है सिर्फ 1,516 सीटें.
5 राज्यो में भाजपा अपने बलबुते पर नहीं दुसरे दल के साथ सरकार में है…
गोवा- कर्णाटक और एमपी में भाजपा की सरकार लेकिन कैसे बनाई…? मोदी लहर होती तो बहुमत नहीं मिलता क्या..?

(जीएनएस, प्रविण घमंडे)
अब की बार…..आंधी नहीं मोदी है…., ये तो मोदी मेजिक है….यही सब सुना है देशने और यही सुनाया गया भारत को. लेकिन क्या वाकई भारत में फिलहाल मोदी मेजिक है या भाजपा द्वारा बनाई गइ बनावटी , दिखावटी आभा है…? या कोई भ्रमणा है…? ये सत्य है कि लोकसभा के पिछले सामान्य चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत 302 सीटें मीली थी. गुजरात और अन्य इक्का दुक्का राज्य में सभी सीटें भाजपा के खाते में गई थी. गुजरात 2014 और 2019 यानि दोनो बार लोकसभा की सभी सीटें भाजपा को ही क्यों मिली उसकी कोइ तहकीकात कांग्रेस ने नहीं की. यहां बता दे कि 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव में शिक्षामंत्री भूपेन्द्रसिंह चुडासमां गलत तरीके से, ठगी के द्वारा जीते थे और ये गुजरात हाइकोर्ट में साबित हो चुका है. मामला सुप्रिम में गया है. उसका फैंसला आयेगा तब तक विधानसभा के अगले सामान्य चुनाव का समय भी आ चुका होगा. हो सकता है मंत्री को फिर से टिकिट न मिले. मामला खतम.
तो यहां मुद्दा जो राजनितिक हल्को में चल रहा है उसमें आंकडे वाइरल हो रहे है और आंकडे बता रहे है कि पूरे समूचे देश में कोइ मोदी मैजिक नहीं है. मसलन, भारत के कुल 28 राज्यों में से 3 राज्य सिक्किम, मिझोरम में सिर्फ एक- एक सीट है और तमिलनाडू में भाजपा के पास एक भी सीट नहीं.
कहां कितनी सीटें है…..तो आंध्र में 175 में से सिर्फ 4 सीटें ही है. केरळ में 140 में से सिर्फ 1 सीट, पंजाब में 117 में से सिर्फ 3 सीटें, प.बंगाल में 294 में से सिर्फ 3 सीटें, तेलंगाणा में 119 में से सिर्फ 5 सीटे, दिल्ही, जीं हां, दिल्ही जहां प्रधानमंत्री मोदीजी खुद बैछ कर पूरे भारत पर राज कर रहै है उस दिल्ही राज्य में भाजपा के पास 70 में से सिर्फ 8 सीटे है. उडीसा में 147 में से सिर्फ 10 सीटें और नगालैन्ड राज्य में 60 में से 12 सीटें है.
जहां भाजपा अन्य दल के साथ सरकार में है वहां क्या नजारा है..मेघालय में 60 में से 2, बिहार में 243 में से 53, जम्मु-कश्मिर में उस वक्त 87 में से 25 और गोवै में 40 में से सिर्फ 13 सीटे मीली थी. वहां भाजपा ने कैसे सरकार बनाई ये बताने का जरूर नहीं. कर्णाटक में कैसे भाजपा की सरकार बनी, मध्यप्रदेश में कैसे सरकार बनी ये ताजा ताजा इतिहास है. और उसे राजस्थान में दोहराने की कोशिश हो रही है लेकिन पायलट कच्चे निकले या गेहलोत पक्के खिलाडी निकले. मामला चल रहा है.
पूरे देश में विधानसभा की कुल 4139 सीट में से भाजपा के पास है सिर्फ 1,516 सीटें. जिसमें 950 सीटे 6 राज्यो में ही है. इन राज्यो में गुजरात, महाराष्ट्र, कर्णाटका, युपी,एमपी और राजस्थान में है. ऐसा कहा जा रहा है कि देश की 66 प्रतिशत सीटों में भाजपा को मतदाताओने नहीं अपनाया. इस वक्त भाजपा के पास 28 में से 12 राज्य है. वै से तो 10 ही कह सकते है. क्योंकि एमपी और कर्णाटका में बहुमत भाजपा को नहीं मिला था. कांग्रेस के लालची विधायको को अपने पाले में लेकर सरकार बनाई. एमपी में अपने पद का उपयोग कर भाजपा की सरकार बनाने में सहाय करनेवाले राज्यपाल लालजी टंडन का हाल ही में निधन हो गया.
5 राज्यो में भाजपा दुसरे दल के साथ सरकार में है. यानि अपने बलबुते पर नहीं. कुलमिलाकर 28 में से अपने बलबुते पर सिर्फ 10( एमपी और कर्णाटक मिलाये तो 12) राज्यो में ही केसरी परचम लहराया है. क्या उसे मोदी मैजिक कह सकते है क्यां..?
लोकसभा के साथ साथ सभी राज्यो में भी केसरिया बालम की धून सुनाई दे तो कह सकते है कि ये है मोदी मैजिक….. !! सभी राज्यो में केसरी परचम नहीं है तो मोदी मैजिक काहे का….?!

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