भोपाल: 30 मार्च 2026
सौरभ शर्मा, विशेष संवाददाता
मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने आज पुलिस मुख्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जोनल एडीजी/आईजी, पुलिस कमिश्नर (इंदौर/भोपाल), डीआईजी और पुलिस अधीक्षकों के साथ नारकोटिक्स पर विस्तृत समीक्षा बैठक की।
बैठक की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री के स्पष्ट विजन से हुई, जिसमें 1 अप्रैल 2026 से मादक पदार्थों के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश पुलिस इस दिशा में सख्ती से आगे बढ़ रही है।
डीजीपी मकवाणा ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। एमडी समेत सभी केमिकल ड्रग्स के पूरे नेटवर्क, स्रोत, वितरण चैनल और मुख्य सरगनाओं—को चिन्हित कर पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा। उन्होंने ऑनलाइन ड्रग सप्लाई, वीपीएन आधारित कॉल्स और डिजिटल माध्यमों पर निगरानी के लिए हर जिले में टेक्निकल सेल को सक्रिय करने तथा साइबर सेल के साथ बेहतर समन्वय का निर्देश दिया।
बैठक में Narco Coordination Centre (NCORD) की नियमित बैठकें सुनिश्चित करने, पड़ोसी राज्यों के साथ अंतर्राज्यीय समन्वय बढ़ाने और दो-सूत्रीय रणनीति—सख्त कानूनी कार्रवाई एवं जनजागरूकता—पर विशेष जोर दिया गया। स्कूल-कॉलेजों में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराने, मुखबिर तंत्र को मजबूत करने और जिलेवार हॉट-स्पॉट्स पर निरंतर छापेमारी के निर्देश दिए गए।
डीजीपी ने एनडीपीएस मामलों में फास्ट ट्रैक ट्रायल, विवेचकों के प्रशिक्षण और ‘निदान’ पोर्टल के अधिकतम उपयोग पर बल दिया। उन्होंने प्रत्येक जिले को 6 अप्रैल 2026 तक विस्तृत रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए, जिसमें पिछले 10 वर्षों के अपराधियों का डेटाबेस, हॉट-स्पॉट्स, वित्तीय जांच और अभियोजन रणनीति शामिल होगी।
डीआईजी रेंज एवं एडिशनल एसपी को नोडल अधिकारी बनाकर नक्सल ऑपरेशनों की तर्ज पर नियमित समीक्षा करने का फैसला लिया गया। बैठक में एडीजी नारकोटिक्स श्री डी. श्रीनिवास वर्मा ने ‘निदान’ पोर्टल के उपयोग पर जोर दिया। अधिकारियों ने ट्रेनों में तस्करी रोकने, जियो-टैगिंग और साइबर ट्रैकिंग बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
यह बैठक मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम साबित होगी।

